Chhattisgarh: बस्तर इलाका 40 से ज्यादा साल तक माओवादियों का गढ़ रहा. माओवादियों ने यहां बड़े इलाकों पर कंट्रोल रखा और सैकड़ों स्मारक बनवाए, जो इलाके में उनके दबदबे का प्रतीक बन गए थे. लेकिन पिछले तीन साल में हालात बदले हैं.
3 साल में 300 से ज्यादा नक्सल स्मारक ध्वस्त
सुरक्षाबलों ने अपने ऑपरेशन के दौरान 300 से ज्यादा माओवादी स्मारकों को भी ध्वस्त किया. ये स्मारक माओवादियों ने अपने नेताओं और सदस्यों की याद में बनवाए थे. इन्हें ध्वस्त करना इसलिए भी जरूरी हो गया था, क्योंकि प्रशासन हरगिज़ इस सोच को पनपने देना नहीं चाहता था.
यहां देखें आंकड़ें
- साल 2018 से 2023 के बीच छह सालों में सुरक्षा बलों ने करीब 60 स्मारक तोड़े थे.
- जिनमें से 24 स्मारक सिर्फ 2021 में ध्वस्त किए गए. लेकिन 2023 में अभियान तेज होने के बाद यह संख्या बढ़ गई.
- 2023 से फरवरी 2026 के बीच 113 स्मारक तोड़े गए.
- इनमें सबसे ऊंचा स्मारक 64 फीट का था, जो बीजापुर जिला मुख्यालय से करीब 90 किलोमीटर दूर तेलंगाना सीमा की ओर कोमतपल्ली गांव में बनाया गया था.
लोगों को डराने होता था स्मारकों का इस्तेंमाल – बस्तर आईजी
बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि माओवादी स्मारकों और प्रतीकों को हटाना एक सोच-समझकर लिया गया फैसला है. इसका मकसद माओवाद की वैचारिक पकड़ को खत्म करना, इलाके में सामान्य स्थिति बहाल करना, सुशासन को मजबूत करना और समाज को मुख्यधारा से जोड़ना है. माओवादियों के जरिए बनाए गए स्मारकों को हटाना उनके सिंबोलिक और दिमागी असर को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम है.” उन्होंने आगे कहा, “पहले इन स्मारकों का इस्तेमाल माओवादी स्थानीय समुदायों में डर और दबदबा बनाए रखने के लिए करते थे. अब इन्हें हटाए जाने से साफ संदेश जाता है कि राज्य की वैध सत्ता और कानून का राज लगातार मजबूत हो रहा है और इलाके में माओवादियों का प्रभाव धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है.”
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