ननकीराम की शिकायतों पर क्यों ध्यान नहीं दे रही सरकार, कहीं सेटिंग का मामला तो नहीं?

रायपुर: वैसे तो सत्ता आने के बाद पार्टी के हर नेता को लगता है कि व्यवस्था सुधरेगी और हमारी हर बात सुनी जाएगी। इसी उम्मीद में हर छोटी बड़ी बातों को बेबाकी से रखते हैं। पूर्व गृहमंत्री और आदिवासी नेता ननकीराम, इसी लिए सरकार को अपनी पीड़ा लिखते हैं। उन्होंने कलेक्टर कोरबा को हटाने अल्टीमेटम देते हुए सीएम को पत्र भी लिखा और राज्यपाल से भी मुलाकात की है। ननकी राम के कोरबा कलेक्टर के कामकाज से खुश नहीं है। कोरबा में रहे पूर्व कलेक्टर पी दयानंद, जो मुख्यमंत्री कार्यालय में ही है, सबूत दे सकते है कि ननकी राम आखिर ऐसा क्यों चाहते हैं। अब वर्तमान कलेक्टर अजीत बसंत को हटाने की मांग भी है।

दरअसल कोरबा जिला भ्रष्ट्राचार का वो गढ़ बन गया है कि यहां कोई भी कलेक्टर आयेगा कोयले की कोठरी में काला होगा। काजल लगेगा ही । रानू साहू ने ऐसा बाजार सजाया है कि जो भी आयेगा उसे मनचाही सुविधा नगद या उपहार में मिलेगी। रायपुर में काबिज अधिकारी ये बता सकते है और बताते भी है कि ननकी राम ऐसा क्यो कर रहे हैं। वे कलेक्टर हटाओ, कोरबा बचाओ का नारा बुलंद करते है। बात में दम है, तो जांच में गुरेज क्यों?

सत्ता में बैठे लोग, संगठन को हल्की निगाहों से देखते है या यूं कहे नजरों से बचते है। ननकी राम ,भाजपा के लिए कितने मूल्यवान है ये तो भाजपा जाने, लेकिन सरकार के लिए कितने बड़े विरोधी है, इसकी पुष्टि महानदी भवन के अफसरों द्वारा कान में कही जाने वाली ये बात है कि नरेंद्र मोदी के लिए सुब्रमण्यम स्वामी जैसा ही आचरण विष्णु देव साय के लिए ननकी राम का है। लोग कहने लगे हैं कि भला आदिवासी, आदिवासी की खिलाफत कैसे कर सकता है?

दूसरे तरफ भाजपा में अनुभवी लेकिन उपेक्षित निर्वाचित और पराजित जन प्रतिनिधियो की बड़ी जमात है। दरकिनार है, पूछ परख नहीं है। मंत्री बनना चाहते थे, नहीं बनाए गए। कद बड़ा था, पर कतर दिए गए। ये लोग ननकी राम के समान खंदक की लड़ाई नहीं लड़ते बल्कि कंधे पर बंदूक रख कर वार करते है। और फिर एक ही काफी है तो क्यों समय और शक्ति जाया किया जाए? सब नैतिक समर्थन दे रहे है ननकी राम को मुंह बंद करके लेकिन मजा जरूर ले रहे है।

4 अक्टूबर की मियाद तय कर दी गई है अपनो के खिलाफ अपने ननकी राम द्वारा। धरना और प्रदर्शन, याने शक्ति परीक्षण। बताते चले कि ये वही ननकी राम है जिन्होंने उच्च न्यायालय में कांग्रेस के जमाने में लोक सेवा आयोग में हुए भर्राशाही और भ्रष्ट्राचार के जरिए हुए नियुक्ति को चुनौती दी थी। इसी आंदोलन ने भाजपा को प्राणवायु दिया था। सरकार बनी तो ननकी राम की मेहनत की भी हिस्सेदारी थी। लोक सेवा आयोग में कार्यरत दो दो पूर्व आईएएस अधिकारी सोनवानी, जीवन लाल सहित आरती वासनिक और कई मुन्ना भाई और मुन्नी बाई जेल दाखिल है तो क्रेडिट ननकी राम को जाता है।

प्रथा है कि जिन सीढिय़ों से चढ़ो उन्हें दरकिनार करो। अब चार तारीख ही फैसला करेगी कि ननकी राम क्या साबित होते है। कांग्रेस को मजा लेने का अवसर मिल गया है। एक आदिवासी का दर्द दिख रहा है उनको। भाजपा को आदिवासी विरोधी बता रहे है। दूर कही पर नौकरशाह कलेक्टर कोरबा को बचाने में तुले है। उनके सिर पर किसी खास बैच का हाथ है। कौन कहता है, अजीत हारते है, बसंत का मौसम सदाबहार है।

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