अफसरशाही को कई योजनाओं को लागू करवाने में रोड़ा

दशहरा के पहले राज्य के नए मुख्य सचिव कार्यभार लेंगे। प्रदेश में यह पहली बार हुआ कि मुख्य सचिव नियुक्त करने में तीन माह तक अफसरों के काबिलियत का छानबीन करना पड़ा। फिर पांच लोगों से जूनियर अधिकारी के नाम आर्डर जारी किया गया। यह सहीं भी है। सत्ता पक्ष को अपनी योजनओं के क्रियान्वयन के लिए यस मैन जरूरी है।
केंद्र में काम कर चुके अफसर अपने नाम के मुताबिक प्रदेश का भी विकास करने में प्रशासनिक नाैकरशाहों पर कैसे कंट्रोल करेंगे यह सवाल उठता है।

मुख्यमंत्री सचिवालय को देखा जाए तो यहां पर 97 बैच के अफसर को कमान सौंपी गई है। वहीं यहां पर 2005 बैच के एक अफसर पहले से ही तैनात हैं। उनकी नियुक्ति सीएम सचिवालय में सबसे पहले हुई। सांय-सांय सरकार के दो साल पूरे होने को है। इधर सरकार के कामकाज का आंकलन करने वाले अब अफसरशाही को कई योजनाओं को लागू करवाने में रोड़ा मान रहे हैं। प्रदेश में जनहित की कई योजनाओं को बंद करने के पीछे कुछ नामचीन उद्योगों को लाभ देने को बताया जाता है। केंद्र सरकार की नीति पर यहां भी स्टील, अडानी और सीमेंट व्यवसाय वालों को सिंडिकेट बन चुका है।

अफसर इसमें जान फूंकने में लगे हैं। यहां पर सीमेंट पर जीएसटी का प्रतिशत घटाया गया, लेकिन किसी भी ब्रांड के दर में कोई अंतर नहीं आया। खनिज विभाग इतना अधिक अनुशासन हीनता के साथ चल रहा है कि बरसात के पहले रेत के ढेर हर सड़क किनारे लगा हुआ है। बाजार का भाव 30 से 35 हजार तक ट्रक में लोग रेत खरीद रहे हैं। कहीं कोई नियंत्रण नहीं। यहां पर सांय-सांय कमाई व्यापारियों की चल ही रही है। नौकरशाह भी पीछे नहीं हैं। अब रही सही कसर नेताओं ने पूरी कर दी है। हर चीज का ब्रांड जहां से शुरू होकर वहीं पर ही खत्म हो रही है। अफसरों को इतना छूट दे दिया गया है कि वे किसी की बात सुनने को तैयार नहीं हैं।

घोटालेबाज अधिकारी की मूल विभाग में वापसी
छत्तीसगढ़ के भूतपूर्व मुख्यमंत्री डा रमन सिंह द्वारा कांग्रेस शासनकाल में हुए 600करोड़ के राशन घोटाले के लिए जिम्मेदार अधिकारी को मूल विभाग में वापस भेज दिया गया है।सामान्य प्रशासन विभाग ने पिछले साल इनकी सेवा संचालनालय से मंत्रालय की थी। मात्र नौ महीने में इस अधिकारी को मंत्रालय से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है।

बताया जाता है कि मंत्रालय स्तर के उच्च अधिकारियों को इस अधिकारी की संलिप्तता खाद्य विभाग में हुए 600 करोड़ के राशन घोटाले को करने और फिर लीपापोती करने से नाराज थे। खाद्य मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार कांग्रेस शासनकाल में हुए घोटाले की मात्रा की अलग अलग केंद्र, राज्य, विधान सभा और मीडिया को दिए गए जानकारी के चलते शासन की किरकिरी हो रही थी।

इस अधिकारी को खाद्य संचालनालय से हटाकर मंत्रालय पदस्थ करने की जानकारी खाद्य संचालनालय की अधिकारी एल्मा के द्वारा दिया गया था। 28 हजार टन शक्कर के कथित घोटाले के जवाब में केवल 15हजार टन शक्कर की कमी को लेकर खाद्य मंत्रालय के उच्च अधिकारियों में नाराजगी देखी गई थी।

कितने आईएएस अधिकारी जेल जाएंगे!

भूपेश बघेल सरकार के घोटाले की विष्णुदेव साय सरकार की तरीके से जांच करे तो एक दर्जन से ज्यादा आई ए एस और आईपीएस अधिकारी जेल जाएंगे, ये आज और प्रमाणित हो गया। अब तक समीर विश्नोई, रानू साहू, टोमन सिंह सोनवानी,अनिल टुटेजा, आलोक शुक्ला, निरंजन दास जीवन लाल ध्रुव गिरफ्तार हो चुके है।दो संभावित आई ए एस अधिकारी सौम्या चौरसिया और आरती वासनिक भी गिरफ्तार हो चुकी है। भारतीय संवर्ग सेवा के अमर पति त्रिपाठी और मनोज सोनी भी जेल यात्रा कर चुके है। ये सभी कोयला, शराब, चांवल, डीएमएफ लोक सेवा आयोग परीक्षा घोटाले में शामिल पाए गए है।

शराब घोटाले में आईएएस विवेक ढांड भी संदेह के दायरे में है।दवाइयों और स्वास्थ्य उपकरण को लेकर दो आईएस भीम सिंह और चंद्रकांत वर्मा संदेह के दायरे में है,देर सबेर इनको भी जेल जाना ही पड़ेगा। चूंकि राज्य की आर्थिक अपराध अनुसंधान विभाग और भ्रष्टाचार निवारण विभाग के अधिकारी आईपीएस ही होते है इस कारण से सहानुभूति के चलते आधा दर्जन आईपीएस अधिकारी खुली हवा में घूम रहे है।

प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने भ्रष्ट्राचार के मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। इसी के चलते केंद्रीय और राज्य की जांच एजेंसियो ने बड़ी मछलियों पर हाथ डालने की हिम्मत की है। राज्य की आर्थिक अपराध एजेंसी फिलहाल पटवारी पकड़ो अभियान में लगी है। राज्य के भ्रष्ट आबकारी,खाद्य, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हरिश्चंद्र है। प्रदेश में अरबों का चांवल, शक्कर घोटाला हुआ है।इस पर नजरे इनायत नहीं हो रही है।

कांग्रेस शासनकाल में कस्टम मिलिंग और राशन दुकानों से चांवल, शक्कर का अरबों का घोटाले में सिर्फ मार्कफेड के अधिकारी पकड़े गए है।खाद्य संचालनालय के अधिकारी द्वारा कंप्यूटरीकृत वितरण व्यवस्था को तहस नहस कर दिए है।इसकी जांच नहीं हो रही है। महिला बाल विकास, श्रम, स्वास्थ्य और उच्च शिक्षा विभाग में पदस्थ आईएएस अधिकारियों ने खूब लूट मचाई है।इनके प्रमाण भी है।

प्रश्न ये भी उठता है कि सीमित अमले वाला आर्थिक अपराध अनुसंधान विभाग कितनी जांच करे? कांग्रेस शासनकाल के घोटाले की जांच करने के लिए एक हजार अधिकारियों की जरूरत पड़ेगी, याने हर विभाग के जांच के लिए स्पेशल 26

नवा बैला के नवा सिंग, बैला चले टिंग टिंग

नवा बैला के नवा सिंग, बैला चले टिंग टिंग] एक लोकप्रिय छत्तीसगढ़ी कहावत है । यह प्रदेश के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव पर फिट बैठता है। विभाग का कार्य भार संभालते ही उन्होंने कई प्रयोग करने का मन बनाया। यहां तक गुजरात राज्य का दौरा कर वहां के तकनीकी औश्र अन्य विषयों के गुर सीख कर आ गए। अब वे शिक्षा विभाग को सुधारने का दावा कर रहे हैं। उनके पहले भी कई लोगों ने नए राज्य में कई प्रकार के प्रयोग किए। उसका परिणाम कैसा रहा शायद अफसरों को मालूम होगा।

रमन सरकार के समय स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने थंब इंप्रेशन मशीन का प्रयोग किया गया। स्कूलों में 5 हजार के मशीनों को 20 हजार में खरीदा गया। कुछ दिनों में वह डब्बा हो गया। आज उसके अवशेष तक स्कूलोंमें देखने को नहीं मिल रहे हैं। अब नए मंत्री
मोबाइल एप के जरिए शिक्षकों को अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का नया मंत्र दे रहे हैं। उनकों नहीं मालूम होगा कि कोई भी शिक्षक अपने क्षेत्र में नहीं रहता अप डाउन कर पहुंचता है। ऐसे में मोबाइल एप से उनकी पहुंच कैसे साबित होगा।

शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करने का नया शिगुफा दिया है। यह नियुक्ति और प्रमोशन दोनों के लिए जरूरी होगा। हालांकि अधिकारियों ने कोर्ट के आदेश पर यह बात मंत्री से कहलवा दी है, लेकिन इसमें कुछ व्यावहारिक दिक्कतें हैं। पहले भी यह परीक्षा शिक्षक बनने के लिए अनिवार्य किया गया था। साल में दो बार परीक्षा होती थी, बाद में इसका पता ही नहीं चला। बीएड, डीएड और अन्य शिक्षक प्रशिक्षण के बाद टेट को लाने का फार्मूला कितना प्रभावी होगा यह समझ के परे हैं। वैसे भी राज्य में शिक्षकों को समय पर प्रमोशन नहीं मिलता। आज भी प्रदेश के स्कूल और कॉलेजों में शिक्षक केवल याचक रह गए हैं।

युक्तियुक्तकरण का शिक्षकों ने विरोध किया उसके बाद भी किया गया। ढेरों गलतियों के बाद भी डीईओ आज भी मजे में है। सिनियर को दुसरी जगह भेज दिया और जूनियर जुगाड़ कर वहीं बैठा है। मंत्रर जी जरा युक्तियुक्त करण की सिरे से जांच कराएंगे तो पाएंगे कि आधे से ज्यादा लोगों को प्रताडित करने डीईओ ने खेला किया। कोरबा के एक शिक्षक को युक्तियुक्तकरण के नाम पर सुकमा भेज दिया।

सरकार ने तीन कमेटी बना दी। अफसर उसमें सदस्य हैं वो भला क्यों अपनी गलती मानेंगे। ऐसे में तीनों समितियों के सामने अभ्यावेदन देने के बाद भी लोगों को कोई रास्ता नहीं मिल रहा। हिन्दी माध्यम में पढाने वाले को अंग्रेजी माध्यम में भेज दिया गया। समिति ने माना यह गलत है फिर भी अब तक उसे कहीं और पदस्थ नहीं किया गया।

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