दिल्ली हाई कोर्ट: PM CARES फंड सूचना के अधिकार से वंचित नहीं, प्राइवेसी का अधिकार बरकरार

दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने कहा है कि PM CARES फंड, भले ही एक कानूनी या सरकारी संस्था हो, सूचना के अधिकार (RTI) कानून के तहत प्राइवेसी के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि यह फंड सार्वजनिक कार्यों में शामिल होने के बावजूद, अपनी प्राइवेसी का अधिकार नहीं खोता। न्यायालय ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि यह फंड पब्लिक अथॉरिटी है और कुछ पब्लिक काम करती है, इसे RTI से बाहर नहीं रखा जा सकता।

यह आदेश गिरीश मित्तल नाम के एक व्यक्ति की अपील पर सुनवाई के दौरान दिया गया। मित्तल ने सिंगल जज के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमीशन (CIC) के आदेश को रद्द कर दिया गया था। CIC ने पहले इनकम टैक्स (IT) विभाग को निर्देश दिया था कि वह RTI के तहत PM CARES फंड को दी गई टैक्स छूट से जुड़ी जानकारी मित्तल को प्रदान करे।

चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने कहा कि भले ही यह फंड सार्वजनिक काम करती है, सिर्फ इसलिए इसे RTI से बाहर नहीं रखा जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि PM CARES फंड अपनी प्राइवेसी का अधिकार खोता नहीं है, लेकिन सार्वजनिक हित के मामलों में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है।

यह फंड सेक्शन 8(1)(j) में दी गई छूट के तहत नहीं आता
सुनवाई के दौरान गिरीश मित्तल के वकील ने तर्क दिया कि यह फंड RTI एक्ट के सेक्शन 8(1)(j) में दी गई प्राइवेसी छूट के तहत नहीं आता। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की प्राइवेसी की सुरक्षा की जानी चाहिए, लेकिन यह सुरक्षा PM CARES फंड जैसे सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट को नहीं दी जा सकती। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने कहा कि भले ही फंड पब्लिक काम करता है, सिर्फ इसलिए इसे RTI से बाहर नहीं रखा जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि फंड अपनी प्राइवेसी का अधिकार खोता नहीं है, लेकिन सार्वजनिक हित और पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी को निर्धारित की है।

CIC के पास जानकारी देने का निर्देश देने का अधिकार नहीं
सिंगल जज ने पहले कहा था कि CIC के पास इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 138 (असेसीज़ के बारे में जानकारी का खुलासा) के तहत जानकारी देने का अधिकार नहीं है। उन्होंने IT विभाग के CPIO की उस अर्जी को मंज़ूरी दे दी थी, जिसमें मुंबई के एक्टिविस्ट गिरीश मित्तल की RTI आवेदन (सेक्शन 6 के तहत) के संबंध में CIC के आदेश को चुनौती दी गई थी।

दी गई TAX छूट के बारे में मांगी थी जानकारी
मुंबई के एक्टिविस्ट गिरीश मित्तल ने PM CARES फंड को दी गई टैक्स छूट से जुड़ी जानकारी मांगने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। मित्तल ने याचिका में निम्नलिखित जानकारी मांगी थी PM CARES फंड द्वारा छूट एप्लीकेशन में जमा किए गए सभी डॉक्यूमेंट्स की कॉपी। छूट मंज़ूरी देने वाली फाइल नोटिंग की कॉपी। 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2020 तक IT विभाग के सामने फाइल की गई सभी छूट एप्लीकेशन की लिस्ट, जिसमें फाइल करने की तारीख और छूट मिलने की तारीख शामिल हो। कोई भी एप्लीकेशन रिजेक्ट हुई हो और रिजेक्शन के कारण। सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमीशन (CIC) ने पहले इस जानकारी को देने का आदेश दिया था। हालांकि, जुलाई 2022 में कोर्ट ने CIC के इस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद मामला हाई कोर्ट में चुनौती के लिए पहुंचा।

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