जिस कफ सिरप ने राजस्थान में ली बच्चों की जान, छत्तीसगढ़ में उसी कंटेंट का बेस्टो कॉफ निकला नकली, लैब रिपोर्ट में खुलासा

CG News: राजस्थान में जिन डेक्सट्रोमेथॉर्फन हाइड्रो ब्रोमाइड कफ सिरप को पीने से बच्चों की मौत हुई थी, उसी कंटेंट वाला कफ सिरप छत्तीसगढ़ की औषधि प्रयोगशाला में जांच के दौरान नकली पाया गया है. बाजार में ये सिरप बेस्टो कॉफ के नाम से बिकती है. मेडिकल स्टोर से नकली सिरप की बिक्री का रैकेट चल रहा था. 21 जुलाई को राजिम स्थित कुलेश्वर मेडिकल एंड जनरल स्टोर से डेक्सट्रोमेथॉर्फन हाइड्रो ब्रोमाइड कफ सिरप का सैंपल कलेक्ट किया गया था.

छत्तीसगढ़ में उसी कंटेंट का बेस्टो कॉफ निकला नकली
नकली कफ सिरप बेचने वाले कुलेश्वर नाथ मेडिकल स्टोर्स को खाद्य एवं औषधीय विभाग द्वारा सिल कर दिया गया है. मेडिकल का लायसेंस रद्द करने के अलावा विभाग जल्द ही कोर्ट में परिवाद पेश कर संचालक सीताराम साहू के खिलाफ बड़ी कार्यवाही करने की तैयारी कर रही है. दरअसल विभाग को सूचना मिली थी कि राजिम स्थित कुलेश्वर मेडिकल का संचालक एक्सपायरी दवाओं पर रि टैगिंग कर बेचता है.

21 जुलाई को ड्रग इंस्पेक्टर की जंबो टिम ने छापा मारा तो नशीली टेबलेट के अलावा कई बिंदुओं में व्यापक अनियमितता मिली थी तत्काल लाइसेंस रद्द किया गया था. ड्रग इंस्पेक्टर धर्मवीर ध्रुव ने बताया कि इस दरम्यान Besto Cof नाम का एक कफ सिरप भी जप्त किया जिसकी जांच कराई गई. 11 अक्टूबर को आई रिपोर्ट चौंकाने वाला था. सिरप के लेबल में उल्लेख कंटेंट जांच में अमानक मिले।मात्रा भी कम पाया गया.

दवा खरीदी का फर्जी बिल दिखाया, मेडिकल संचालक के खिलाफ केस दर्ज
फर्म ने जांच के दरम्यान अफसरों को बताया था कि वे दवा रायपुर के KPS फर्म से खरीदी किया था. इस डिस्टुब्टर का बिल भी दिखाया जो जांच में फर्जी निकला. दरअसल दिए गए बिल दूसरी दवा के थे लेकिन मेडिकल संचालक ने डिस्ट्रीब्यूटर फर्म के बिल का गलत इस्तेमाल किया. जिसके चलते KPS फर्म ने राजिम मेडिकल संचालक के खिलाफ रायपुर सिविल लाइन थाने में मामला दर्ज करा दिया है.

औषधि प्रशाशन मामले से जुड़ी बारीकियों की जांच में जुट गई. औषधि प्रशासन विभाग ने डेक्सट्रोमेथॉर्फन हाइड्रो ब्रोमाइड कफ सिरप बनाने वाली आज्ञा बायोटेक (हरिद्वार) व कफ सिरप बनवाने वाली मार्केटर दवा कंपनी को पत्र लिखा था. दोनों कंपनियों ने पत्र लिखकर सैंपल के नकली होने की पुष्टि किया है. जिसके बाद अब विभाग पता लगा रही है कि ये दवा किस जगह से आ रहा था या मेडिकल संचालक खुद बना रहा था. जिले में और कितनी जगह बांट दी गई उसकी जांच भी अफसर कर रहे हैं.

गरियाबंद के ड्रग इंस्पेक्टर धर्मवीर सिंह ध्रुव ने बताया कि मेडिकल संचालक के खिलाफ परिवाद पेश किया जा रहा है. उससे पहले नकली सिरप से जुड़ी सभी तथ्यों की जांच की जा रही है. दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्यवही होगी.

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