छत्तीसगढ़ राज्य में निर्माण के साथ ही आईपीएस अधिकारियों के बीच जो खाई बनी उसके सालों साल गहरीकरण का कार्य दो खेमे में बंटा पुलिस विभाग के आईपीएस अधिकारी करते आ रहे है। चाहे अजीत जोगी मुख्य मंत्री रहे हो या रमन सिंह रहे हो या फिर भूपेश बघेल या अब विष्णु देव साय, सबके कार्यकाल में मुख्यालय वर्सेस मुख्यालय के बाहर के अधिकारियों के बीच अघोषित रूप से गुरिल्ला युद्ध चलते आ रहा है। छत्तीसगढ़ में आर्थिक अपराध अनुसंधान विभाग और भ्रष्ट्राचार निवारण विभाग सहित अनेक पुलिस विभाग मुख्यालय से बाहर हुई।
राज्य में अपराध नियंत्रण के लिए भले ही गृह विभाग कार्यरत है लेकिन हस्तक्षेप मुख्य मंत्री कार्यालय का हुआ करता है। राज्य में पुलिस अधीक्षक की पदस्थापना में मुख्यमंत्री कार्यालय का ही दबदबा बना हुआ है। पुलिस विभाग की छबि सबसे ज्यादा भूपेश बघेल के सरकार के शासनकाल में हुआ। पुलिस के अधिकांश वरिष्ठ अधिकारी दायित्व निर्वाह के बजाय अनिल टुटेजा और सौम्या चौरसिया के चाकरी करने लग गए । आर्थिक अपराध अनुसंधान विभाग तो मानो चपरासी से गए गिरे हो गए थे। इस विभाग का सबसे बड़ा अधिकारी अनिल टुटेजा के बेटे यश टुटेजा की भी चाकरी करने लगे थे।



भूपेश बघेल के कार्यकाल में इसी अधिकारी ने अपने ही विभाग के बड़े अधिकारी के लिए बकायदा सुनियोजित षडयंत्र रचा।सोना पकड़वाया। राष्ट्रद्रोह का आरोप मढ़ दिया ।इसका कारण था ऊपर स्वामिभक्ति दिखाना। छत्तीसगढ़ की जनता को मूर्ख और निरीह मानने का चैट करने वाला इस अधिकारी के कार्यकाल में राज्य के सरकारी अधिकारी हरिश्चंद्र हो गए थे। न तो अनुपातहीन संपत्ति का केस बना न ही रिश्वत लेते अधिकारी पकड़ाए। सब सेट था। अधिकारियों के झूठी शिकायत बना कर बुलाना और टारगेट पूरा करना इनका प्रमुख काम था।
महादेव सट्टा में आधा दर्जन आईपीएस अधिकारी फंसे हुए है। चूंकि पुलिस विभाग के ही अधिकारियों को अपने विभाग के अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही करना है इस कारण सहानुभूति का दौर चल रहा है। भाजपा के सत्ता में आने के बाद उम्मीद जागी थी कि जिस प्रकार भ्रष्ट आईएएस अधिकारियों की जेल यात्रा शुरू हुई है वैसे ही आईपीएस अधिकारी भी नपेंगे लेकिन भाजपा में ही दिल्ली का आशीर्वाद पाने वालों ने बचाओ बचाओ का खेल आरम्भ कर दिया है। शराब घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का बेटा चैतन्य बघेल बिट्टू गिरफ्तार होने के साथ एक बिग बॉस व्हाट्सएप की चर्चा जोरो पर है। इस ग्रुप में अनिल टुटेजा और सौम्या चौरसिया, सूर्यकांत तिवारी, चैतन्य बघेल भर थे।



इनके चेट का स्क्रीन शॉट चालान में लगा हुआ है लेकिन पुलिस विभाग के कुछ अधिकारी न्यायालय से बाइज्जत बरी हुए अधिकारी की बेइज्जती का ठेका ले कर भाजपा के एक तबके के साथ हाथ मिला कर एक हनी ट्रैप अधिकारी को बचाने का खेल, खेल रहे है। क्या मान लिया जाए कि केवल सरकार बदली है, चाल चेहरा और चरित्र पुराने शासनकाल का है
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