US Iran Talks in Islamabad: अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बनने के बजाय बिगड़ती जा रही है. इसके पीछे की वजह होर्मुज स्ट्रेट ही है. ईरान की तरफ से इसे पूरी तरह बंद कर दिया गया है. तो वहीं दूसरी तरफ अमेरिका अपनी नाकाबंदी भी नहीं हटा रहा है. यही वजह है कि तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है. रविवार को अमेरिका ने ईरान के एक मालवाहक जहाज को अपने कब्जे में ले लिया है. इस तरह की घटनाओं के कारण दूसरे दौर की बातचीत पर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर पिछले 2 महीनों से लगातार कच्चे तेल की कीमतों पर देखने को मिल रहा है. कीमतें इस समय आसमान छू रही हैं. होर्मुज की मौजूदा स्थिति के बाद एक बार फिर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिला है.
अमेरिकी ऑयल बेंचमार्क WTI की कीमत में सोमवार को 7.5% की तेज बढ़त दर्ज की गई. इस समय कच्चे तेल की कीमत 90.17 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड में कीमत 6.5% बढ़कर 96.27 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. यही वजह है कि हर किसी को एक बार फिर जंग शुरू होने का डर सता रहा है.
दूसरे दौर की बातचीत पर सस्पेंस
अमेरिका और ईरान के बीच पहले दौर की बातचीत पाकिस्तान में हुई थी. हालांकि यह बातचीत फेल हो गई थी. यहां 21 घंटों से ज्यादा तक दोनों देशों के नेताओं ने अपनी अपनी बात एक दूसरे के सामने रखी थी. जिन पर आखिर तक सहमति नहीं बन पाई. वहीं दूसरे दौर की बातचीत के लिए भी पाकिस्तान में तैयारियां जोरों पर हैं.
इन सब के बीच ईरान ने साफ कर दिया कि वह अब अमेरिका से बातचीत नहीं करेगा. दूसरी तरफ अमेरिका कहना है कि ईरान के पास प्रस्ताव पर साइन करना ही आखिरी विकल्प है. अगर ऐसा नहीं हुआ तो पूरे देश को खत्म कर दिया जाएगा. पाकिस्तान में दूसरे दौर की वार्ता में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का दौरा टल गया है. ईरान ने अमेरिका पर अपने वादों से मुकरने और विश्वासघात करने का आरोप लगाया है.
बातचीत से पहले ईरान की शर्त
ईरान ने अमेरिका से बातचीत के लिए शर्त रखी है. उसकी तरफ से कहा गया है कि जब तक अमेरिका होर्मुज से नाकाबंदी खत्म नहीं करेगा. तब तक किसी तरह की बातचीत संभव ही नहीं है. यह बात ईरान के पाकिस्तान में राजदूत और अन्य सूत्रों ने भी कही है. हालांकि पाकिस्तान दोनों देशों को बातचीत के लिए मनाने में जुटा हुआ है.
22 अप्रैल को खत्म हो रहा सीजफायर
अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों का सीजफायर हुआ था. जो कि 22 अप्रैल को खत्म हो रहा है. ऐसे में सभी को टेंशन है कि अगर बातचीत शुरू नहीं होती है तो क्या जंग दोबारा शुरू हो जाएगी? अगर दोनों के बीच पाकिस्तान में शांति वार्ता होती है तो उम्मीद की जा रही है कि दोनों देशों के बीच तनाव कम हो सकता है. इसके साथ ही सीजफायर भी बढ़ाया जा सकता है.
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