CG News: छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 से जुड़े एक अहम मामले में हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सीतापुर से भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो को राहत दी है. आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी मुन्ना लाल टोप्पो द्वारा दायर चुनाव याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया. यह फैसला जस्टिस संजय के. अग्रवाल की एकल पीठ ने सुनाया.
नामांकन खारिज करने को दी थी चुनौती
यह मामला निर्वाचन याचिका क्रमांक 01/2024 से संबंधित था, जिसमें याचिकाकर्ता ने अपने नामांकन पत्र को रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा निरस्त किए जाने को चुनौती दी थी. उनका कहना था कि नामांकन गलत आधार पर खारिज किया गया. इस प्रकरण में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता डॉ. जितेंद्र किशोर मेहता और आनंद कुमार कुजूर ने पक्ष रखा, जबकि राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अधिवक्ता राकेश कुमार झा उपस्थित हुए. वहीं विधायक रामकुमार टोप्पो की ओर से अधिवक्ता शरद मिश्रा ने पैरवी की.
प्रतिवादी पक्ष ने रखा अहम तर्क
सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता ने स्वयं अपने नामांकन पत्र और शपथपत्र में सरकार के साथ अनुबंध होने की बात स्वीकार की है. ऐसे में वह बाद में अपनी अयोग्यता से इनकार नहीं कर सकता. साथ ही यह भी बताया गया कि जल जीवन मिशन के तहत ये अनुबंध प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 9A के अंतर्गत अयोग्यता का आधार बनते हैं.
अदालत ने याचिका को किया निरस्त
अदालत ने दस्तावेजों और साक्ष्यों की जांच के बाद पाया कि याचिकाकर्ता ने खुद सरकारी अनुबंध की जानकारी दी थी, इसलिए वह अपने ही बयान से पीछे नहीं हट सकता. कोर्ट ने यह भी माना कि रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा उपलब्ध रिकॉर्ड और तथ्यों के आधार पर नामांकन निरस्त करने की प्रक्रिया पूरी तरह वैध थी. याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सके कि उनका नामांकन गलत तरीके से खारिज किया गया था. सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए प्रत्येक पक्ष को अपना खर्च स्वयं वहन करने का निर्देश दिया.
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